बिहार में बढ़ती गर्मी बनी चिंता का कारण
बिहार में लगातार बढ़ती गर्मी और तेज धूप लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है और हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन तथा थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी हो जाता है।
गर्मी में किन बातों का रखें ध्यान?
जरूरी सावधानियां:
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक तेज धूप में बाहर निकलने से बचें
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- ज्यादा पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें
- खाली पेट बाहर न निकलें
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
- बाहर से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडा पानी न पिएं
- धूप में निकलते समय सिर को कपड़े या कैप से ढकें
गर्मी में क्या खाना और पीना चाहिए?
गर्मी के मौसम में हल्का, पौष्टिक और ठंडक देने वाला भोजन शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है।
गर्मी में फायदेमंद चीजें:
- सत्तू का शरबत
- मीठी या नमकीन लस्सी
- छाछ
- नारियल पानी
- तरबूज और खीरा
- दही
- बेल का शरबत
- नींबू पानी
- मौसमी फल
बिहार के पारंपरिक Summer Coolers
बिहार में गर्मी से राहत पाने के लिए पारंपरिक पेय पदार्थों का काफी महत्व है। गांव से लेकर शहर तक लोग सत्तू और लस्सी को सबसे बेहतरीन देसी कूलर मानते हैं।
सत्तू क्यों है खास?
सत्तू शरीर को ठंडा रखने के साथ ऊर्जा भी देता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है। बिहार में लोग नमकीन और मीठा दोनों तरह का सत्तू पसंद करते हैं।
लस्सी देती है तुरंत राहत
दही से बनी लस्सी शरीर को ठंडक पहुंचाती है और पेट को भी स्वस्थ रखती है। कई लोग कुल्हड़ वाली लस्सी को गर्मी का सबसे शानदार विकल्प मानते हैं।
क्या नहीं खाना चाहिए?
- ज्यादा तेल और मसाले वाला खाना
- लगातार चाय-कॉफी
- बहुत ज्यादा ठंडे ड्रिंक्स
- बासी भोजन
- खाली पेट लंबे समय तक रहना
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। इसलिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए और बाहर निकलते समय ORS या ग्लूकोज साथ रखना चाहिए।
निष्कर्ष
गर्मी के मौसम में छोटी-छोटी सावधानियां आपको बीमार होने से बचा सकती हैं। बिहार के पारंपरिक पेय जैसे सत्तू, लस्सी और छाछ न केवल स्वादिष्ट हैं बल्कि शरीर को प्राकृतिक ठंडक भी देते हैं। ऐसे मौसम में खुद का और परिवार का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।