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वायरल दावे की पड़ताल : क्या अखबार में समोसा-पकौड़ा देने पर हो सकती है जेल? जानिए FSSAI के नियम और शिकायत प्रक्रिया

Info Bihar | विशेष रिपोर्ट

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि अखबार में समोसा-पकौड़ा या अन्य खाद्य सामग्री परोसने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है। इसके साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, इस विषय को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि FSSAI का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। खाद्य पदार्थों को सीधे अखबार या प्रिंटेड कागज में परोसना या पैक करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

आखिर अखबार में खाना परोसना क्यों गलत माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार अखबार में उपयोग होने वाली स्याही (Ink) और विभिन्न रसायन खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने पर भोजन को दूषित कर सकते हैं। गर्म समोसा, पकौड़ा, जलेबी या अन्य खाद्य पदार्थ इन रसायनों को अवशोषित कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसी कारण FSSAI समय-समय पर खाद्य विक्रेताओं, रेस्तरां संचालकों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अखबार या प्रिंटेड पेपर के उपयोग से बचने की सलाह देता रहा है।

क्या सीधे जेल हो सकती है?

सोशल मीडिया पर वायरल संदेशों में अक्सर दावों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है। वास्तविक स्थिति यह है कि किसी भी मामले में कार्रवाई संबंधित नियमों, जांच और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर की जाती है। केवल वायरल पोस्ट देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

यदि कोई खाद्य व्यवसाय संचालक खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत नोटिस, जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उपभोक्ता कैसे करें शिकायत?

यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि किसी दुकान, होटल, रेस्तरां या खाद्य विक्रेता द्वारा असुरक्षित या नियमों के विपरीत खाद्य सामग्री बेची जा रही है, तो वह FSSAI के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायत के प्रमुख माध्यम हैं:

शिकायत करते समय स्थान, फोटो, बिल या अन्य उपलब्ध साक्ष्य संलग्न करना उपयोगी माना जाता है।

बिहार में क्या है स्थिति?

बिहार के कई शहरों में आज भी अनेक छोटे खाद्य प्रतिष्ठानों और ठेलों पर समोसा, पकौड़ा, चाट और अन्य खाद्य सामग्री अखबार या प्रिंटेड कागज में परोसी जाती है। जागरूकता की कमी और सस्ती पैकेजिंग सामग्री के कारण यह प्रथा अब भी देखने को मिलती है।

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ उपभोक्ताओं और दुकानदारों को भी जागरूक होना होगा ताकि सुरक्षित भोजन की संस्कृति विकसित हो सके।

निष्कर्ष

अखबार में भोजन परोसने का मुद्दा केवल नियमों का नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य का भी विषय है। उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन का अधिकार है और खाद्य व्यवसाय संचालकों की जिम्मेदारी है कि वे स्वच्छ एवं मानक पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करें।

सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी दावे को सत्य मानने से पहले उसकी तथ्यात्मक जांच करना आवश्यक है। वहीं, यदि कहीं खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन दिखाई दे तो संबंधित प्राधिकरण को शिकायत कर उचित कार्रवाई की मांग की जा सकती है।

– Info Bihar Desk

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