दीपावली, जिसे दिवाली भी कहा जाता है, भारत के सबसे लोकप्रिय और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक माना जाता है। दीपावली के अवसर पर घरों में दीपक जलाए जाते हैं, रंगोली बनाई जाती है, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है तथा परिवार और मित्रों के बीच खुशियां बांटी जाती हैं।
बिहार सहित पूरे देश में दीपावली का त्योहार बड़े उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप, पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।
दीपावली 2026: कब है दिवाली? जानिए महत्व, परंपराएं और बिहार में त्योहार की खास रौनक
दीपावली 2026: इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। भारत सरकार और बिहार सरकार के अवकाश कैलेंडर में भी इस तारीख की पुष्टि की गई है।
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दीपावली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा कर और रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था। तभी से दीपावली को प्रकाश और खुशियों के पर्व के रूप में मनाने की परंपरा प्रचलित है।
इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी की आराधना से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
बिहार में दीपावली की खास रौनक
बिहार में दीपावली का त्योहार पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और राज्य के अन्य शहरों में बाजारों की रौनक देखते ही बनती है।
- घरों और दुकानों की साफ-सफाई एवं सजावट की जाती है।
- मिट्टी के दीये, मोमबत्तियां और रंग-बिरंगी लाइटें लगाई जाती हैं।
- घरों के दरवाजे पर आकर्षक रंगोली बनाई जाती है।
- परिवार के सदस्य मिलकर लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं।
- मिठाइयां और उपहार बांटकर खुशियां साझा की जाती हैं।
दीपावली के बाद बिहार में छठ महापर्व की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। यही वजह है कि नवंबर का महीना बिहार की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लिहाज से बेहद खास होता है।
दीपावली पर बाजारों में बढ़ती रौनक
दीपावली के अवसर पर बाजारों में मिट्टी के दीये, सजावटी सामान, मिठाइयां, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और उपहारों की खरीदारी बढ़ जाती है। छोटे दुकानदारों, कुम्हारों और स्थानीय कारोबारियों के लिए यह त्योहार रोजगार और आमदनी का महत्वपूर्ण अवसर भी लेकर आता है।
स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीये खरीदना उनकी आजीविका को सहयोग देने का एक अच्छा तरीका है।
सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल दीपावली मनाने की अपील
खुशियों का त्योहार मनाते समय पर्यावरण और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
- मिट्टी के दीयों का अधिक उपयोग करें।
- पटाखों से होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करें।
- बच्चों को पटाखों से दूर रखें और बड़ों की निगरानी में ही उत्सव मनाएं।
- बिजली की सजावट में सुरक्षित उपकरणों का इस्तेमाल करें।
- जरूरतमंद लोगों के साथ मिठाइयां और खुशियां साझा करें।
दीपावली का संदेश: हर घर में हो खुशियों का उजाला
दीपावली हमें सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न हों, उम्मीद और सकारात्मकता का दीप हमेशा जलाए रखना चाहिए। यह त्योहार आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और एकता का संदेश देता है।
आइए, इस दीपावली पर अपने घर के साथ-साथ किसी जरूरतमंद के जीवन में भी खुशियों का उजाला फैलाएं।
Info Bihar की ओर से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।