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खेत की मिट्टी बचाइए, पैदावार बढ़ाइए: संतुलित उर्वरक ही बनेगा किसानों की सबसे बड़ी ताकत : Info Bihar

अधिक यूरिया का इस्तेमाल मिट्टी की सेहत बिगाड़ रहा है, विशेषज्ञों ने दी संतुलित खाद अपनाने की सलाह

INFO BIHAR | कृषि विशेष

बिहार सहित देश के कई राज्यों में किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद में यूरिया का अधिक मात्रा में उपयोग कर रहे हैं। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा यूरिया खेत की मिट्टी की उर्वरता को धीरे-धीरे कम कर देता है, जिससे भविष्य में फसल उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

खेती केवल अधिक खाद डालने से नहीं, बल्कि संतुलित पोषण प्रबंधन से सफल होती है। सही मात्रा में नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) का उपयोग ही मिट्टी और फसल दोनों के लिए लाभदायक माना जाता है।


अधिक यूरिया क्यों है नुकसानदायक?

विशेषज्ञों के अनुसार लगातार अधिक यूरिया डालने से—

  • मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता घटती है।
  • लाभदायक सूक्ष्मजीव नष्ट होने लगते हैं।
  • फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  • उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
  • लंबे समय में खेत की उत्पादक क्षमता कम होने लगती है।

संतुलित उर्वरक का क्या है महत्व?

कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान मिट्टी जांच (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें।

संतुलित पोषण के लाभ:

  • फसल की बेहतर वृद्धि
  • अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन
  • कम लागत में बेहतर परिणाम
  • मिट्टी की सेहत लंबे समय तक सुरक्षित
  • पर्यावरण संरक्षण में मदद

मिट्टी जांच क्यों है जरूरी?

हर खेत की मिट्टी अलग होती है। ऐसे में बिना जांच के खाद डालना नुकसानदायक हो सकता है।

मिट्टी जांच से पता चलता है—

  • कौन-सा पोषक तत्व कम है।
  • कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए।
  • किस फसल के लिए कौन-सा उर्वरक उपयुक्त रहेगा।

जैविक खेती को भी दें बढ़ावा

रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ किसान इनका भी उपयोग कर सकते हैं—

  • गोबर की खाद
  • वर्मी कम्पोस्ट
  • हरी खाद
  • जैव उर्वरक
  • फसल अवशेष प्रबंधन

इससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम होती है।


किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  • मिट्टी की जांच कराएं।
  • आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक डालें।
  • यूरिया का अंधाधुंध प्रयोग न करें।
  • जैविक खाद का उपयोग बढ़ाएं।
  • कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें।

निष्कर्ष

आज की खेती में केवल अधिक उर्वरक डालना ही सफलता की गारंटी नहीं है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन, मिट्टी की नियमित जांच और वैज्ञानिक खेती ही भविष्य की टिकाऊ कृषि का आधार हैं। यदि किसान आज मिट्टी की सेहत का ध्यान रखेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों को भी उपजाऊ खेत और बेहतर उत्पादन मिलेगा।